गुरुवार, 16 अगस्त 2012

गाँड़ा भाई जागौ जी

       
                                          
गाँड़ा भाई जागौ जी, मोर गाँड़ा भाई जागौ ग,
          रेंगत नईये घिसलत नईये,  गाड़ी समाज के सजाव ग
गाँड़ा भाई जागौ जी, मोर गाँड़ा भाई जागौ ग,
          नोनी बाबू दादी दादू जागे, खुद पढ़व कुटुम्ब पढाव ग |

महतारी  मन  आघू  आवा,  घूँघट   के   तोपना   ल  टोरा                                
बेंड़ी बड़ बजूर  व्यवस्था के,  शिक्षा  के  फरसा  म  फोरव ग
माता लईका के पहिली गुरु,  ये  भेद  के बात ल  जानव ग  
चेलिक सियान अब आघू आवा,   धुरा  समाज के धारव  ग
भूले  भटके मोर  जात  सगा,  खूँटहर   रद्दा   चतावारव  ग
रखवारी अब तुँहर  जिम्मेदारी , एके  छानी  सब ल राखव ग |   मोर ......
बुजरुग जुन्ना मुड़ जिद छोड़ा , नवा खून  ल  आघू आवन दव
दुत्कार के चिखना अबड़ चीखेन, सम्मान के सवाद ल पावन दव
होस  सियानी  जोस  जवानी ,  सझियारा   मेवा   पागव  ग   | मोर ....
तुलसी  चौंरा  जौंरा  भौंरा,  तोर   डहर  निहारत  गढ़  गौरा
तोर  दया मया पारस पिरती,  पन   पुरखा के  कुलपे  किरती
जुम्मट होके  सब जुर मिल के, ओ  किरती  आज  उघारव ग |  मोर...
मोर छत्तीसगढ़ के शिरोधनी, तोर अनिज बनिज तोर कनी मनी
मोर गाँव  कोट के  कोटवार , मोर  खेत  खार  के मुक्तियार
तोर संग  तोर परिहा परजा हे , तोर मुड़  समाज के करजा हे
ओई  करजा के अंधियारी  म,  करतब  के  बाती  बारव  ग |  मोर ....
अपनेच  कह के अतका दिन ले, जो  हमर  पेट  ल काटिन हे
हमर  बाँटा  अव  हिस्सा ल,  जो  कुकुर  बरोबर  चाटिन  हे
ओई कुकूर जूठा चटोइया के,  थोथना  म  मुटका  मारव  ग |  मोर ...
बाजा  बिंदरा  ल बजाये म,  ये  जग  बैरी  हिन  मान  करै  
छोड़व अपमान के गठरी ल,  अपनावा  जेम्मा  सम्मान  मिलै  
अब किसिम किसिम के काम बुता,  अलगे पहचान बनावव ग |  मोर ...  

                               गजेन्द्र+लखन चौहान

रविवार, 13 मई 2012

विनम्र अपील

               ( गाँड़ा  जाति  समुदाय के हित में जारी )
         स्नेही स्वजातीय बहनो एवं भाइयो !
        प्रत्येक समाज का एक अतीत, वर्तमान एवं भविष्य होता है I वर्तमान  की नींव पर भविष्य का निर्माण होता है I  हमारे समाज के अतीत को बदला तो नहीं जा सकता पर उससे सबक जरूर लिया जा सकता है I तो क्या हमारे जाति समुदाय के इतिहास को देखते हुए ऐसा लगता है, कि हम वर्तमान में ऐसा कुछ कर रहे  हैं कि जाति समुदाय  के  एक सुदृढ़  भविष्य का निर्माण हो I  क्या आने वाली पीढ़ी हमारे सामाजिक कर्मों के ऊपर  गर्व कर सकेगी | क्या हमारे जाति समुदाय का सामुदायिक एकीकरण, सामाजिक उत्थान में कोई योगदान है, जिन्हें  कम से कम  एक वाक्य  में बयाँ की   जा सके | क्या संस्कृतिकरण की दिशा में हम अग्रसर हो रहे हैं या हमारे जाति समुदाय में ठहराव आ गया है | निःसंदेह ( वस्तुतः) व्यक्तिगत स्तरीकरण में बदलाव आया है, परन्तु क्या जातिगत स्तरीकरण में किसी तरह का बदलाव दिखता है | ऐसी घड़ी में हमारी आत्मा की पुकार क्या हो, कर्तव्य की पुकार क्या हो, चिन्तन की दिशा क्या हो | क्या ये प्रश्न आपके चेतन, अवचेतन मन को आत्ममंथन के लिए आन्दोलित करते हैं, यदि हाँ तो मेरी आपसे निवेदन है कि आज और अभी से कमर कसकर तैयार हो जाइये कि समाज के उत्थान के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा करने में किसी तरह की कोई कसर न उठा रखेंगे |