( गाँड़ा जाति समुदाय के हित में जारी )
स्नेही स्वजातीय बहनो एवं भाइयो !
प्रत्येक समाज का एक अतीत, वर्तमान एवं भविष्य होता है I वर्तमान की नींव पर भविष्य का निर्माण होता है I हमारे समाज के अतीत को बदला तो नहीं जा सकता पर उससे सबक जरूर लिया जा सकता है I तो क्या हमारे जाति समुदाय के इतिहास को देखते हुए ऐसा लगता है, कि हम वर्तमान में ऐसा कुछ कर रहे हैं कि जाति समुदाय के एक सुदृढ़ भविष्य का निर्माण हो I क्या आने वाली पीढ़ी हमारे सामाजिक कर्मों के ऊपर गर्व कर सकेगी | क्या हमारे जाति समुदाय का सामुदायिक एकीकरण, सामाजिक उत्थान में कोई योगदान है, जिन्हें कम से कम एक वाक्य में बयाँ की जा सके | क्या संस्कृतिकरण की दिशा में हम अग्रसर हो रहे हैं या हमारे जाति समुदाय में ठहराव आ गया है | निःसंदेह ( वस्तुतः) व्यक्तिगत स्तरीकरण में बदलाव आया है, परन्तु क्या जातिगत स्तरीकरण में किसी तरह का बदलाव दिखता है | ऐसी घड़ी में हमारी आत्मा की पुकार क्या हो, कर्तव्य की पुकार क्या हो, चिन्तन की दिशा क्या हो | क्या ये प्रश्न आपके चेतन, अवचेतन मन को आत्ममंथन के लिए आन्दोलित करते हैं, यदि हाँ तो मेरी आपसे निवेदन है कि आज और अभी से कमर कसकर तैयार हो जाइये कि समाज के उत्थान के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा करने में किसी तरह की कोई कसर न उठा रखेंगे |
उच्च वर्ग के लोगों को जोड़ने के लिए प्रयास अच्छा है , वह दिन दूर नहीं जब सभी जाति समुदाय के लोग एक मंच पर आकर एकजुट होकर समाज के हित के लिए आगे बढ़ कर कार्य करेंगे | इस प्रयास के लिए साधुवाद
जवाब देंहटाएंधन्यवाद ! आपके मार्ग दर्शन की मुझे सदैव आवश्यकता रहेगी |
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